बांग्लादेश में हिंदुओं पर हो रहे अत्याचार को लेकर सोमवार को पश्चिम बंगाल विधानसभा में जोरदार हंगामा हुआ। मुख्यमंत्री ममता बनर्जी और विपक्ष के नेता शुभेंदु अधिकारी के बीच तीखी बहस हुई, जिसमें शुभेंदु अधिकारी ने ममता बनर्जी पर तुष्टिकरण की राजनीति का आरोप लगाया। इस मुद्दे ने टीएमसी और बीजेपी के बीच गहरा तनाव पैदा कर दिया। शुभेंदु अधिकारी ने ममता बनर्जी की आलोचना करते हुए सवाल उठाया कि क्या इस्कॉन और सायन घोष पर हुए हमले फर्जी थे। उन्होंने कहा कि ममता बनर्जी फर्जी बयान देकर अपनी तुष्टिकरण की नीति छिपाने की कोशिश कर रही हैं।
विधानसभा में ममता बनर्जी ने विपक्ष पर बंगाल में तनाव पैदा करने का आरोप लगाया और कहा कि कुछ राजनीतिक दल राज्य में सांप्रदायिक सौहार्द को खराब करने की कोशिश कर रहे हैं। ममता ने कहा कि हमें संयम से काम लेना चाहिए और ऐसा कुछ नहीं करना चाहिए जिससे माहौल खराब हो। शुभेंदु अधिकारी ने इसके जवाब में कहा कि यदि बांग्लादेश में भारतीयों पर हमले हो रहे हैं, तो राज्य सरकार को इसका कड़ा विरोध करना चाहिए। उन्होंने यह भी कहा कि बांग्लादेश में हो रही घटनाओं से पश्चिम बंगाल में व्यापक जनाक्रोश फैल रहा है।
शुभेंदु अधिकारी ने ममता सरकार के मंत्रियों पर भी निशाना साधा। उन्होंने आरोप लगाया कि मंत्री सिद्दीकुल्लाह चौधरी बांग्लादेश के विवादास्पद नेता मुहम्मद यूनुस का समर्थन कर रहे हैं और प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी की आलोचना कर रहे हैं। उन्होंने कहा कि जब हिंदू विरोध प्रदर्शन करना चाहते हैं तो उन्हें उच्च न्यायालय से अनुमति लेनी पड़ती है, जबकि सरकार अन्य मामलों में आसानी से अनुमति देती है।
इस दौरान बांग्लादेश की कोलकाता पर कब्जे की कथित धमकी पर भी तीखी प्रतिक्रिया सामने आई। शुभेंदु अधिकारी ने इस धमकी का मजाक उड़ाते हुए कहा कि क्या बांग्लादेश रिक्शे से कोलकाता पर कब्जा करेगा। ममता बनर्जी ने भी इस पर पलटवार करते हुए कहा कि जो लोग इस तरह की धमकियां दे रहे हैं, वे कितने गंभीर हैं।
मुख्यमंत्री ममता बनर्जी ने यह भी कहा कि अगर बांग्लादेश में भारतीयों पर हमले होते हैं, तो उनकी सरकार इसे बर्दाश्त नहीं करेगी। उन्होंने कहा कि हमारा परिवार और हमारी संपत्ति बांग्लादेश में हैं, और हम भारत सरकार के रुख का सम्मान करेंगे। लेकिन, दुनिया के किसी भी हिस्से में धार्मिक उत्पीड़न को बर्दाश्त नहीं किया जाएगा।
