प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने गुरुवार को ब्रिटेन के राजा चार्ल्स III से बातचीत की, जिसमें राष्ट्रमंडल, जलवायु कार्रवाई और स्थिरता सहित परस्पर हित के विषयों पर चर्चा हुई। प्रधानमंत्री ने राजा चार्ल्स तृतीय के स्वास्थ्य का हालचाल लिया और उनके अच्छे स्वास्थ्य और खुशहाली की शुभकामनाएं दीं। इस संवाद में दोनों नेताओं ने भारत और ब्रिटेन के बीच ऐतिहासिक संबंधों को और मजबूत करने पर जोर दिया।
प्रधानमंत्री कार्यालय के अनुसार, प्रधानमंत्री मोदी ने भारत-ब्रिटेन की व्यापक रणनीतिक साझेदारी को सुदृढ़ करने की प्रतिबद्धता दोहराई। उन्होंने दोनों देशों के ऐतिहासिक संबंधों की याद दिलाते हुए कहा कि भारत और ब्रिटेन के बीच संबंध समय के साथ और गहरे हुए हैं। बातचीत के दौरान दोनों नेताओं ने हाल ही में समोआ में आयोजित राष्ट्रमंडल शासनाध्यक्षों के सम्मेलन पर भी विचारों का आदान-प्रदान किया।
जलवायु परिवर्तन और संवहनीयता जैसे महत्वपूर्ण वैश्विक मुद्दों पर चर्चा करते हुए प्रधानमंत्री मोदी ने राजा चार्ल्स III की इन मुद्दों पर सक्रिय भूमिका और समर्थन की सराहना की। प्रधानमंत्री ने भारत द्वारा शुरू की गई विभिन्न पहलों की जानकारी साझा की और वैश्विक स्थिरता के लिए दोनों देशों के प्रयासों को और मजबूत करने की बात कही।
प्रधानमंत्री मोदी और राजा चार्ल्स III ने आगामी क्रिसमस और नववर्ष के त्योहारों के लिए एक-दूसरे को शुभकामनाएं दीं। प्रधानमंत्री ने सोशल मीडिया प्लेटफॉर्म एक्स पर बातचीत का जिक्र करते हुए लिखा, “आज एचएम किंग चार्ल्स III के साथ बात करके खुशी हुई। भारत-ब्रिटेन संबंधों को मजबूत करने की प्रतिबद्धता की पुष्टि की। राष्ट्रमंडल, जलवायु कार्रवाई और स्थिरता सहित परस्पर हित के मुद्दों पर विचारों का आदान-प्रदान किया। उनके अच्छे स्वास्थ्य और खुशहाली की कामना की।”
गौरतलब है कि फरवरी में किंग चार्ल्स III को एक प्रकार के कैंसर का पता चला था, जिसके चलते उन्हें अपने सार्वजनिक कर्तव्यों को अस्थायी रूप से स्थगित करना पड़ा। ब्रिटिश शाही परिवार ने अप्रैल में घोषणा की थी कि राजा उपचार और स्वास्थ्य लाभ की अवधि के बाद जल्द ही सार्वजनिक जीवन में वापसी करेंगे। प्रधानमंत्री मोदी ने राजा के प्रति अपनी शुभकामनाएं प्रकट करते हुए उनके स्वास्थ्य लाभ की प्रशंसा की।
यह संवाद भारत और ब्रिटेन के बीच द्विपक्षीय सहयोग को और सुदृढ़ करने के साथ-साथ वैश्विक मुद्दों पर एकजुटता को दर्शाता है। यह वार्ता दोनों देशों के बीच ऐतिहासिक संबंधों को नई ऊर्जा देने का प्रतीक है
