भारतीय वायुसेना (IAF) की पूर्वी क्षेत्र में रणनीतिक क्षमता को और मजबूत करने की दिशा में एक बड़ा कदम उठाया जा रहा है। अंडमान-निकोबार स्थित कार निकोबार एयरबेस के उन्नत रनवे का उद्घाटन 2 जनवरी 2026 को चीफ ऑफ डिफेंस स्टाफ (CDS) जनरल अनिल चौहान द्वारा किया जाएगा।
कार निकोबार एयरबेस की भौगोलिक स्थिति अत्यंत महत्वपूर्ण है। यह मलक्का जलडमरूमध्य के निकट स्थित है, जो वैश्विक व्यापार और ऊर्जा आपूर्ति का एक प्रमुख समुद्री मार्ग है। इस कारण यह क्षेत्र रणनीतिक रूप से अत्यंत संवेदनशील माना जाता है।
ऑपरेशनल क्षमता में बड़ा इजाफा
रनवे के उन्नयन से भारतीय वायुसेना की परिचालन क्षमता में उल्लेखनीय वृद्धि होगी। रक्षा सूत्रों के अनुसार, रनवे को इस प्रकार पुनर्निर्मित किया गया है कि वह भारी विमानों और लगातार उड़ानों को संभाल सके।
इसके साथ ही, एप्रन क्षेत्र का विस्तार किया गया है, जिससे एक साथ अधिक विमानों की तैनाती संभव होगी और उनका टर्नअराउंड समय भी कम होगा। एक नया टैक्सी ट्रैक भी विकसित किया गया है, जिसे आपात स्थिति में वैकल्पिक रनवे के रूप में इस्तेमाल किया जा सकता है।
ये सभी सुविधाएं 37 विंग एयर फोर्स स्टेशन के अंतर्गत संचालित होंगी, जिससे पूर्वी क्षेत्र में भारत की त्वरित प्रतिक्रिया और अग्रिम तैनाती क्षमता मजबूत होगी।
लड़ाकू विमानों की तैनाती
उद्घाटन के बाद, Su-30 MKI लड़ाकू विमान कार निकोबार से संचालन की अगुवाई करेंगे। इनके साथ मिराज फाइटर जेट्स भी तैनात किए जाएंगे। ये विमान लंबी दूरी के स्ट्राइक अभ्यास और लाइव फायर ड्रिल्स में हिस्सा लेंगे, जिससे क्षेत्रीय युद्ध-तैयारी को मजबूती मिलेगी।
इसके अलावा, इस उन्नत रनवे से मिसाइल परीक्षण और निगरानी गतिविधियों को भी अधिक प्रभावी ढंग से अंजाम दिया जा सकेगा।
रणनीतिक महत्व
रक्षा विशेषज्ञों के अनुसार, यह कदम हिंद-प्रशांत क्षेत्र में भारत की बढ़ती रणनीतिक भूमिका को दर्शाता है। कार निकोबार की स्थिति भारत को समुद्री गतिविधियों पर नजर रखने और किसी भी आपात स्थिति में त्वरित कार्रवाई करने में सक्षम बनाती है।
बढ़ती वैश्विक प्रतिस्पर्धा के बीच यह उन्नयन भारत की सैन्य तैयारियों और क्षेत्रीय सुरक्षा प्रतिबद्धताओं को और मजबूत करता है।
