इन दिनों भारत में वायु प्रदूषण एक बहुत बड़ी समस्या बनी हुई है. हर साल देश में इन दिनों धुल और धुंए की चादर दिल्ली व उत्तर भारत को अपनी चपेट में ले लेती है. इस बढ़ते प्रदूषण के चलते कई बार ऐसा देखा गया है की ग्लोबल इवेंट कैंसल हो जाते है. बड़े बड़े इवेंट या तो स्थगित हो जाते है या फिर उनको पूरी तरह से कैंसल कर दिया जाता है. यहाँ तक की राष्ट्र प्रमुखों की मीटिंग तक में रुकावट देखी गई है.
जब बराक ओबामा 2015 में भारत आए थे। वे गणतंत्र दिवस की परेड में शामिल होने वाले पहले अमेरिकी राष्ट्रपति थे। यह भारत-अमेरिका रिश्तों में एक महत्वपूर्ण क्षण था। लेकिन तब खबरों में क्या हावी था? दिल्ली की हवा।
एक शीर्षक में कहा गया, राष्ट्रपति महोदय, दुनिया की सबसे खराब हवा आपके जीवन से छह घंटे छीन रही है! इसी कारण तब मिशेल ओबामा अधिकांश सार्वजनिक कार्यक्रमों में शामिल नहीं हुई थीं। इस बार क्रिकेट विश्व कप के साथ भी यही कहानी दोहरा रही है।
यकींन मानिये ये बढ़ता प्रदूषण ना सिर्फ इंसानों के लिए बल्कि देश की आर्थिक और ग्लोबल छवि के लिए भबी बहुत घातक सिद्ध होने वाला है. हर साल होने वाले इस प्रदूषण के लिए दीपावली के पटाखों को सबसे ज्यदा दोषी माना जाता रहा है और इसको लेकर सुप्रीम कोर्ट ने पटाखों को बैन भी किया हुआ है. लेकिन यकीं मानिये ये सिर्फ एक कारण नहीं है. दुनिया की पांचवीं सबसे बड़ी अर्थव्यवस्था, दुनिया का आठवां सबसे प्रदूषित देश भी है। दुनिया के 30 सबसे प्रदूषित शहरों में से 22 अकेले भारत में हैं। दिल्ली तीसरे नंबर पर है।
भारत की जीडीपी का लगभग 50% निर्माण और खेती जैसे आउटडोर-सेक्टर से आता है। हवा खराब हुई तो मजदूरों को खामियाजा भुगतना होगा। उत्पादकता गिरेगी। इसका असर जीडीपी पर पड़ेगा। एक अध्ययन के अनुसार प्रतिवर्ष 95 अरब डॉलर तक के नुकसान का जिक्र किया गया है। यह जीडीपी का लगभग 2.5% है।
भारत तेजी से दुनिया की नजर में आ रहा है। हमने सितम्बर में जी-20 नेताओं के शिखर सम्मेलन की मेजबानी की थी। लेकिन साल बढ़ते प्रदूषण के बीच सवाल भी एक ही है की आखिर अब आगे क्या होगा ? जिम्मेदारी कौन लेगा ? सरकारें क्या करेगी ? आखिर कब तक ये आरोप प्रत्यारोप चलता रहेगा ?
अब समय आ गया है की देश का नागरिक और मतदाता नेताओ को उनकी जिम्मेदारी का एहसास करवाए और जल्द से जल्द इस समस्या को रोकने का उपाए करें। वरना आप यकीं मानिये ये हवा का जहर देश को धीरे धीरे खतम कर देगा।
