प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी शुक्रवार को दिल्ली के पालम हवाई अड्डे पर पहुंचे, जहां उन्होंने अपनी महत्वपूर्ण द्विदेशीय यात्रा—फ्रांस और अमेरिका—को संपन्न किया। यह यात्रा कूटनीतिक बैठकों, रणनीतिक चर्चाओं और आर्थिक सहयोगों से भरी रही, जिससे भारत की वैश्विक स्थिति को और मजबूती मिली और इन दोनों प्रमुख अंतरराष्ट्रीय भागीदारों के साथ द्विपक्षीय संबंध और सुदृढ़ हुए।
फ्रांस में पीएम मोदी ने कई उच्चस्तरीय कार्यक्रमों में भाग लिया, जिनमें एआई एक्शन समिट शामिल रहा, जहां वैश्विक नेताओं और शीर्ष तकनीकी कंपनियों के सीईओ एकत्र हुए। सह-अध्यक्ष के रूप में मोदी ने कृत्रिम बुद्धिमत्ता के महत्व पर जोर दिया और वैश्विक तकनीकी सहयोग को बढ़ावा देने की बात कही। इस दौरान व्यापार, ऊर्जा और सांस्कृतिक संबंधों पर भी अहम चर्चाएं हुईं, जिससे भारत-फ्रांस संबंध और मजबूत हुए।
फ्रांस यात्रा की मुख्य उपलब्धियों में मार्सिले में फ्रांस के राष्ट्रपति इमैनुएल मैक्रों के साथ बैठक शामिल रही। दोनों नेताओं ने इंटरनेशनल थर्मोन्यूक्लियर एक्सपेरिमेंटल रिएक्टर प्रोजेक्ट का दौरा किया, जिसमें भारत एक प्रमुख भागीदार है। इसके अलावा, दोनों नेताओं ने संयुक्त रूप से मार्सिले में भारतीय वाणिज्य दूतावास का उद्घाटन किया, जिससे फ्रांस में भारत की राजनयिक उपस्थिति और सशक्त हुई। पीएम मोदी ने प्रथम और द्वितीय विश्व युद्ध में शहीद हुए भारतीय सैनिकों को मजार्ग युद्ध कब्रिस्तान में श्रद्धांजलि अर्पित की। यात्रा के समापन पर राष्ट्रपति मैक्रों ने मार्सिले हवाई अड्डे पर मोदी को व्यक्तिगत रूप से विदाई दी, जो भारत-फ्रांस संबंधों की गहरी आत्मीयता को दर्शाता है।
इसके बाद पीएम मोदी अमेरिका पहुंचे, जहां उन्होंने व्हाइट हाउस में अमेरिकी राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप से मुलाकात की। यह बैठक तब हुई जब ट्रंप ने 20 जनवरी 2025 को अमेरिका के 47वें राष्ट्रपति के रूप में कार्यभार संभाला था। दोनों नेताओं के बीच चार घंटे चली इस बैठक में रणनीतिक और सुरक्षा सहयोग, रक्षा साझेदारी, व्यापार, आर्थिक संबंध, तकनीकी भागीदारी, ऊर्जा सुरक्षा और वैश्विक चुनौतियों पर विस्तृत चर्चा हुई।
राष्ट्रपति ट्रंप ने पीएम मोदी का गर्मजोशी से स्वागत करते हुए भारत-अमेरिका साझेदारी की मजबूती पर जोर दिया और कहा कि दोनों देश “मजबूत एकता और मित्रता” साझा करते हैं। मोदी ने भी राष्ट्रपति ट्रंप को दूसरे कार्यकाल के लिए बधाई दी और भारत-अमेरिका रणनीतिक साझेदारी को और सुदृढ़ करने की प्रतिबद्धता दोहराई। साथ ही, उन्होंने अपने लगातार तीसरी बार प्रधानमंत्री बनने को ऐतिहासिक राजनीतिक उपलब्धि बताया, जो छह दशकों में पहली बार हुआ है।
इस यात्रा के दौरान पीएम मोदी ने कई प्रमुख हस्तियों से मुलाकात की, जिनमें अमेरिका की नई राष्ट्रीय खुफिया निदेशक तुलसी गबार्ड, टेस्ला के सीईओ एलन मस्क और उद्यमी विवेक रामास्वामी शामिल रहे। इन मुलाकातों में कृत्रिम बुद्धिमत्ता, इलेक्ट्रिक मोबिलिटी, आर्थिक सहयोग और राष्ट्रीय सुरक्षा से जुड़े मुद्दों पर चर्चा हुई। विदेश सचिव विक्रम मिस्री ने प्रेस ब्रीफिंग में बताया कि इन बैठकों से दोनों देशों की द्विपक्षीय प्राथमिकताओं को स्पष्ट रूप से रेखांकित किया गया।
मिस्री ने यह भी बताया कि पीएम मोदी राष्ट्रपति ट्रंप के पुनर्निर्वाचन के बाद अमेरिका का दौरा करने वाले पहले वैश्विक नेताओं में से एक थे। व्हाइट हाउस में हुई चर्चाओं में रक्षा, सुरक्षा, व्यापार, आर्थिक विकास और क्षेत्रीय स्थिरता से जुड़े सभी पहलुओं को समाहित किया गया।
इस यात्रा के दौरान पीएम मोदी ने नवाचार और तकनीकी प्रगति को बढ़ावा देने के महत्व को भी रेखांकित किया, जो भारत के डिजिटल भविष्य के दृष्टिकोण से मेल खाता है। विभिन्न क्षेत्रों के नेताओं से उनकी बातचीत ने भारत की वैश्विक तकनीकी, सतत विकास और आर्थिक नेतृत्व की प्रतिबद्धता को दर्शाया।
पीएम मोदी की इस यात्रा ने भारत की बढ़ती कूटनीतिक शक्ति को पुनः स्थापित किया और अमेरिका व फ्रांस की भारत के साथ संबंधों को और गहरा करने की प्रतिबद्धता को दर्शाया। इस यात्रा के दौरान हुई चर्चाएं व्यापार, रक्षा, तकनीक और रणनीतिक मामलों में सहयोग को बढ़ाने का मार्ग प्रशस्त करेंगी, जिससे भारत की वैश्विक स्थिति और मजबूत होगी।
