जम्मू-कश्मीर पुलिस ने पहलगाम आतंकियों से जुड़े एक महत्वपूर्ण सुराग का खुलासा किया है। जांच में सामने आया कि आतंकियों ने सामान्य मोबाइल चार्जर और अन्य उपकरण ई-कॉमर्स प्लेटफॉर्म से खरीदकर अपने हैंडलर्स और ओवरग्राउंड सहयोगियों से संपर्क बनाए रखा। यह मामला यह दिखाता है कि कैसे आम उपकरण भी आतंकवाद की लॉजिस्टिक चेन को उजागर करने में महत्वपूर्ण साबित हो सकते हैं।
चार्जर बरामदगी और ई-कॉमर्स ट्रेल
“ऑपरेशन महादेव” के दौरान डाचीगाम जंगल में सुरक्षा बलों ने आतंकियों के साथ मुठभेड़ की। इस दौरान तीन मोबाइल चार्जर बरामद किए गए। शुरुआती रूप से यह मामूली लगता था, लेकिन तकनीकी जांच में इसकी गंभीरता सामने आई। एक चार्जर के साथ ऑरोरा गोल्ड रंग का Vivo T2X 5G मोबाइल भी मिला, जिससे जांच की शुरुआत हुई।
जम्मू-कश्मीर पुलिस ने Vivo और Flipkart से संपर्क किया। Vivo ने चार्जर की प्रमाणिकता की पुष्टि की और Flipkart ने लेन-देन के रिकॉर्ड साझा किए, जिनमें यह पता चला कि यह उपकरण मुसैब अहमद चोपन के माध्यम से Md यूसुफ कटारी को बेचा गया। भुगतान डिजिटल प्लेटफॉर्म mPay और J&K बैंक रिकॉर्ड से पुष्टि हुई।
जांच में यह स्पष्ट हुआ कि कटारी तीन आतंकियों — अफगान भाई, सुलेमान शाह और जिबरान — को लॉजिस्टिक सहायता प्रदान कर रहा था। चार्जर की बरामदगी ने उनके छिपने और सक्रिय रहने में कटारी की भूमिका उजागर की।
ओवरग्राउंड वर्कर्स की गिरफ्तारी और जांच का विस्तार
कटारी ने पूछताछ में स्वीकार किया कि उसने आतंकियों को न केवल मोबाइल उपकरण बल्कि भोजन, आश्रय और अन्य सहायता भी प्रदान की। इस गिरफ्तारी से दक्षिण कश्मीर में ओवरग्राउंड सहयोगियों और आतंकियों के बीच के नेटवर्क का पता चला।
कटारी की गिरफ्तारी से पहले, जून में एनआईए ने पहलगाम के दो अन्य निवासियों, बशीर अहमद जोथार और पारवेज अहमद, को आतंकियों को सहायता प्रदान करने के आरोप में गिरफ्तार किया था। कटारी के बयान और तकनीकी प्रमाणों से अब इस पूरे सपोर्ट नेटवर्क को उजागर करने के अवसर मिलेंगे।
अफगान भाई, सुलेमान शाह और जिबरान पहले ही बैसरण हत्याकांड में 26 नागरिकों की हत्या में शामिल थे। उनके संचालन में स्थानीय सहयोगियों का योगदान उनकी बचाव और संचालन क्षमता को बनाए रखने में महत्वपूर्ण था।
जांच ने यह भी दिखाया कि आतंकियों ने ई-कॉमर्स चैनलों का巧तुर उपयोग किया। सामान्य मोबाइल और चार्जर खरीदकर उन्होंने ध्यान आकर्षित किए बिना उपकरण जुटाए। चार्जर बरामद होने और खरीद ट्रेल की पड़ताल ने यह सिद्ध कर दिया कि आधुनिक आतंकवाद निरोध डिजिटल और वित्तीय फोरेंसिक पर भी निर्भर करता है।
जम्मू-कश्मीर पुलिस के लिए कटारी की भूमिका उजागर करना एक महत्वपूर्ण उपलब्धि है। ई-कॉमर्स खरीद, बैंकिंग रिकॉर्ड और पूछताछ से प्राप्त जानकारी ने इस छिपे हुए आतंक समर्थन नेटवर्क को प्रकाश में लाया है।
