सैन्य सहयोग से हटकर अब अमेरिका ने यूक्रेन के साथ आर्थिक साझेदारी की ओर रुख किया है। एक नए निवेश समझौते के तहत दोनों देशों ने दुर्लभ खनिजों के क्षेत्र में सहयोग को प्राथमिकता दी है, जिससे यूक्रेन के संसाधन क्षेत्र में अमेरिकी भागीदारी का रास्ता खुल गया है।
सैन्य मदद के बदले आर्थिक साझेदारी
यह समझौता उस समय हुआ है जब राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप और यूक्रेनी राष्ट्रपति वोलोदिमिर ज़ेलेंस्की के बीच लंबे समय से तनाव जारी है। ट्रंप ने रूस के 2022 आक्रमण के बाद यूक्रेन को दी गई सहायता के एवज़ में $500 अरब की भरपाई की मांग की थी, जो अब तक अनुमानित $120 अरब अमेरिकी खर्च से कहीं अधिक है। ज़ेलेंस्की ने इस मांग को अस्वीकार करते हुए इसे अगली पीढ़ियों के लिए अस्थिर बताया।
इसके बजाय, दोनों देशों ने एक रणनीतिक आर्थिक समझौते को प्राथमिकता दी, जो अमेरिका को यूक्रेन की अर्थव्यवस्था में दीर्घकालिक निवेश की अनुमति देता है, जबकि यूक्रेन को कर्ज़ की कोई बाध्यता नहीं होगी।
निवेश फंड से होगी बुनियादी ढांचे और संसाधनों में वृद्धि
इस समझौते का केंद्र बिंदु है “रिकंस्ट्रक्शन इन्वेस्टमेंट फंड”, जिसे अमेरिका और यूक्रेन संयुक्त रूप से प्रबंधित करेंगे। दोनों को बराबर वोटिंग अधिकार दिए गए हैं। अगले दस वर्षों तक इस फंड से प्राप्त लाभ केवल यूक्रेन के बुनियादी ढांचे और प्राकृतिक संसाधनों के विकास में लगाया जाएगा।
यूक्रेन के प्रधानमंत्री डेनिस श्मिहाल ने स्पष्ट किया कि देश अपनी ज़मीन, बुनियादी ढांचे और प्राकृतिक संसाधनों पर पूर्ण संप्रभुता बनाए रखेगा। वहीं, अर्थव्यवस्था मंत्री यूलिया स्विरीडेंको ने इस समझौते में तकनीकी स्थानांतरण की भूमिका को महत्वपूर्ण बताया, क्योंकि यूक्रेन को न केवल पूंजी की बल्कि नवाचार की भी आवश्यकता है।
दुर्लभ खनिजों में भारी संभावना, सुरक्षा प्रावधान नहीं
यूक्रेन में दुनिया के लगभग 5% दुर्लभ खनिज भंडार होने का अनुमान है, जिनमें ग्रेफाइट, लिथियम, मैंगनीज़ और टाइटेनियम शामिल हैं। हालांकि इनमें से कई संसाधनवाले क्षेत्र अभी रूसी कब्ज़े में हैं, कीव का मानना है कि निवेश यूक्रेन-नियंत्रित इलाकों में विकास की शुरुआत कर सकता है। नोवोपोल्टावस्के स्थित केवल एक लिथियम खनिज क्षेत्र को ही विकसित करने के लिए $300 मिलियन की आवश्यकता बताई गई है।
हालांकि इस समझौते में कोई सैन्य या सुरक्षा प्रावधान शामिल नहीं है। अमेरिका ने केवल यह कहा है कि वह यूक्रेन की सुरक्षा आश्वासन की खोज का समर्थन करता है। अमेरिकी वित्त मंत्री स्कॉट बेसेंट ने इस समझौते को अमेरिका की यूक्रेन में आर्थिक हिस्सेदारी का संकेत बताया और इसे सैन्य हस्तक्षेप से हटकर एक नई दिशा बताया।
डोनाल्ड ट्रंप ने यूक्रेन की सुरक्षा गारंटी और नाटो विस्तार से खुद को दूर रखा है, लेकिन उन्होंने क्षेत्र में अमेरिका की आर्थिक मौजूदगी को महत्वपूर्ण माना है। अब यह रुख इस नए निवेश समझौते के ज़रिए औपचारिक रूप ले चुका है।
