भारत और चीन के संबंधों में हाल ही में उभर रहे संतुलन के प्रयासों के बीच, भारतीय विदेश मंत्रालय ने चीन की यात्रा करने या वहां से ट्रांजिट करने वाले भारतीय नागरिकों के लिए एक महत्वपूर्ण परामर्श जारी किया है। मंत्रालय ने कहा है कि चीन की यात्रा करने वालों को विशेष सावधानी और विवेक अपनाना चाहिए, क्योंकि हाल ही में अरुणाचल प्रदेश की एक महिला नागरिक को शंघाई एयरपोर्ट पर हिरासत में लिए जाने की घटना ने गंभीर चिंता पैदा की है। भारत ने चीन से यह भी मांग की है कि भारतीय यात्रियों को किसी भी प्रकार की मनमानी, भेदभावपूर्ण या भयादायक परिस्थितियों का सामना न करना पड़े। यह चेतावनी दोनों देशों के बीच संवेदनशील कूटनीतिक माहौल को दर्शाती है, जहाँ नागरिकों के साथ व्यवहार भी द्विपक्षीय संबंधों को प्रभावित कर सकता है।
भारत की सलाह—चीन यात्रा और ट्रांजिट के दौरान “पूरा विवेक” अपनाएं, भेदभाव न होने की मांग
भारतीय विदेश मंत्रालय के प्रवक्ता रंधीर जायसवाल ने अपने साप्ताहिक मीडिया ब्रीफिंग में कहा कि सरकार हाल के दिनों में सामने आए कई परेशान करने वाले मामलों से अवगत है। उन्होंने कहा कि भारत अपने नागरिकों को चीन के किसी भी शहर में यात्रा करते समय या सिर्फ कुछ घंटों के ट्रांजिट के दौरान भी पूरी सावधानी और विवेक अपनाने की सलाह देता है। यह चेतावनी किसी यात्रा-प्रतिबंध जैसे कठोर कदम का संकेत नहीं है, बल्कि इस बात का स्पष्ट संदेश है कि मौजूदा परिस्थितियाँ पूरी तरह सामान्य नहीं हैं।
भारत ने यह स्पष्ट किया है कि चीन के अधिकारियों की यह जिम्मेदारी है कि वे भारतीय यात्रियों को अंतरराष्ट्रीय हवाई यात्रा नियमों के तहत सम्मानजनक और सुरक्षित व्यवहार प्रदान करें। इस संदर्भ में भारत ने चीन से आश्वासन की मांग की है कि भारतीय नागरिकों को न तो अनावश्यक पूछताछ का सामना करना पड़े, न ही उन्हें बिना किसी उचित कारण हिरासत में लिया जाए।
प्रवक्ता ने यह भी कहा कि भारतीय यात्रियों पर मनमानी कार्रवाई या उत्पीड़क रवैया दो राष्ट्रों के बीच भरोसा बहाल करने के ongoing प्रयासों को कमजोर कर सकता है। भारत ने दोहराया कि यात्री के पास वैध यात्रा दस्तावेज हों तो केवल उसकी राष्ट्रीयता या उसके भारत के किसी विशेष राज्य से आने के आधार पर उसे निशाना बनाना किसी भी तरह स्वीकार्य नहीं है।
यह भी महत्वपूर्ण है कि यह सलाह उस समय आई है जब भारत और चीन हाल के वर्षों में सीमा तनावों के कारण बिगड़े संबंधों को धीरे-धीरे सुधारने की कोशिश कर रहे हैं। ऐसे में यात्रियों—विशेषकर संवेदनशील क्षेत्रों से आने वालों—के साथ होने वाली घटनाएँ कूटनीतिक माहौल को नकारात्मक रूप से प्रभावित कर सकती हैं।
विदेश मंत्रालय ने जोर देकर कहा कि अंतरराष्ट्रीय ट्रांजिट यात्रियों के साथ किसी भी तरह के दुरुपयोग की कोई गुंजाइश नहीं है, क्योंकि ऐसे यात्रियों का उद्देश्य केवल विमान बदलना होता है, और उनके लिए कठोर पूछताछ या लंबी हिरासत अंतरराष्ट्रीय प्रथाओं के विरुद्ध है। भारत यह सुनिश्चित करना चाहता है कि उसके नागरिकों को कहीं भी भयभीत या असहज महसूस न हो, विशेषकर ऐसे समय में जब वैश्विक यात्रा में अस्थिरता बढ़ती जा रही है।
शंघाई एयरपोर्ट पर हिरासत का मामला—भारत की चिंता का मुख्य कारण
विदेश मंत्रालय की सलाह का सबसे बड़ा कारण 21 नवंबर को सामने आया वह मामला है, जिसमें अरुणाचल प्रदेश की रहने वाली और वर्तमान में ब्रिटेन में रह रही पेम वांगजॉम थोंगडोक को शंघाई एयरपोर्ट पर हिरासत में ले लिया गया। वह जापान जा रही थीं और उनके पास तीन घंटे का ट्रांजिट स्टॉप था। उनके पास पूर्ण रूप से वैध भारतीय पासपोर्ट और जापान का वीज़ा था, फिर भी उन्हें चीनी इमिग्रेशन अधिकारियों ने रोक लिया और 18 घंटे से अधिक देर तक हिरासत में रखा।
थोंगडोक ने अपने अनुभव में बताया कि उनसे बार-बार सवाल किए गए, उन्हें मजाक का विषय बनाया गया और यहां तक कहा गया कि वे “चाइनीज़ पासपोर्ट बनवा लें।” यह कथन न केवल दखलअंदाज़ी था, बल्कि क्षेत्रीय संवेदनशीलताओं को देखते हुए एक बेहद चिंताजनक संकेत था। चीन अरुणाचल प्रदेश को अपने क्षेत्र का हिस्सा बताता है, जबकि भारत इसे सख्ती से खारिज करता है। ऐसे में इस क्षेत्र से आने वाले भारतीयों के साथ चीन के अधिकारियों द्वारा कठोर व्यवहार की आशंकाएँ पहले भी जताई जाती रही हैं।
थोंगडोक ने बताया कि उन्हें न तो स्पष्ट रूप से बताया गया कि उन्हें रोका क्यों गया है, और न ही यह समझाया गया कि उन्हें अपनी उड़ान क्यों मिस करनी पड़ी। 18 घंटे से अधिक समय तक हिरासत में रखे जाने से उनके सभी यात्रा कार्यक्रम बिगड़ गए। सबसे चिंताजनक बात यह रही कि उन्हें मानसिक उत्पीड़न का सामना करना पड़ा और वह स्वयं को बिना किसी सहायता के असुरक्षित महसूस कर रही थीं।
इस घटना के सामने आने के बाद भारत में आम नागरिकों के बीच भय और असमंजस बढ़ गया है। बहुत से लोग अब चीन के रास्ते यात्रा करने से बचने की सलाह दे रहे हैं। सोशल मीडिया पर भी इस घटना को लेकर व्यापक बहस छिड़ गई, जिसमें कई लोगों ने सवाल किया कि क्या यह घटना सिर्फ एक ‘मिसअंडरस्टैंडिंग’ थी या किसी बड़े पैटर्न का हिस्सा।
भारत सरकार ने इस मामले को चीन के सामने औपचारिक रूप से उठाया है और मांग की है कि ऐसी घटनाओं की पुनरावृत्ति नहीं होनी चाहिए। भारत ने यह भी स्पष्ट किया है कि किसी भी भारतीय नागरिक के साथ अपमानजनक या भेदभावपूर्ण व्यवहार दोनों देशों के रिश्तों को नुकसान पहुंचा सकता है।
इस घटना के व्यापक प्रभाव इसलिए भी हैं क्योंकि यात्री संबंधी मुद्दे अक्सर दो देशों के बीच जनता की धारणा को सीधे प्रभावित करते हैं। नागरिकों को सुरक्षा का भरोसा न होना कूटनीतिक विश्वास को भी कमजोर करता है और यात्रा, व्यापार तथा सांस्कृतिक संबंधों को धीमा कर सकता है।
